• रोज़ की तरह तैराकी के लिए जा रही दस वर्षीय लिली अवंत को नही पता था की यह सुहावना दिन उसके जीवन का सबसे भयावह दिन होगा। उस बच्ची को इस बात का ज़रा भी आभास नही था कि उसकी मासूम सी दुनिया बिखर जाएगी।
  • यह घटना अमेरिका के टेक्सास की है।रोज़ की तरह लिली तैराकी के लिए ब्रजोस नदी मे गयी हुई थी की अचानक उसकी तबियत बिगड़ गयी।उसे तुरंत अस्पताल पहुंचाया गया जहाँ वो कोमा मे चली गईं और अंत में उसने दम तोड़ दिया। दरअसल तैराकी के दौरान लिली फ्रेस वाटर मे पाए जाने वाले एक अमीबा से संक्रमित हो गयी जिस का नाम नैगलेरिया फोवलेरी होता है। यह अमीबा विशेषकर जल स्त्रोतों से मनुष्य की नाक में घुस जाता है और नासिका द्वारा सीधे ब्रेन में पहुंचकर ब्रैन की कोशिकाओं को खा जाता है।

 

चिकिसकों के अनुसार इस रोग के लक्षणों में मरीज़ को सिरदर्द, बुख़ार, उल्टी,गरदन मे अकडन, दौरे पड़ना,ओर चक्कर आने लगते हैं। ये संक्रमण ज़्यादातर तैराकों व गोताखोरों को होता है। मरीज की उम्र एक हफ़्ते तक ही सीमित रह जाती है। इस रोग की रोकथाम हेतु चिकित्सक कहते हैं कि यदि किसी को भी तैराकी से आने के बाद अचानक तेज़ बुख़ार, सर में दर्द,गरदन मे जकड़न,उलटी होने जैसा हो तो उसे नज़रअंदाज़ न करते हुए किसी अच्छे चिकित्सक को जरूर दिखाएं।

इस संक्रमण के रोकथाम के ये उपाय चिकित्सक बताते हैं:

फ्रेश वाटर के तालाब और नदियों में तैरने से बचें।

गोताखरों औऱ तैराकों को नोज क्लिप का इस्तेमाल करना चाहिये।

कम गहरे पानी मे ज्यादा उछल कूद ना करें।

 

यह एक रेयर किस्म का संक्रमण है। इसे लिली की किस्मत कहें कि उस दिन नदी में लिली के अलावा 40 लोग और मौजूद थे पर लिली ही उस अमीबा से संक्रमित हुई जिसने उसका फूल सा जीवन कुछ ही पलों में छीन लिया।लिली के परिवार को अभी भी विश्वास नहीं है कि वो हँसती मुसकुराती लड़की अब नही रही।पर इस मुश्किल वक़्त में हम सभी उनके परिवार के साथ हैं।

 

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