हनुमान चालीसा तुलसीदास जी की अवधी में लिखी एक काव्यात्मक कृति है।इसमे प्रभु राम के भक्त  हनुमान के गुण एवम कार्यों का 40 चौपाई मे सुंदर वर्णन है।पर क्या आप जानते हैं कि इन चौपाइयों मे  और भी कई रहस्य छुपे हुए हैं ?यदि इन पंक्तियों का गूढ़ अध्ययन करें तो इस में जीवन में सफल होने का रहस्य छुपा हुआ है।आईये जानते हैं क्या रहस्य है इन पंक्तियों का..

  • श्री गुरू चरण सरोज रज निज मन मुकुरु सुधारि।वर नाउ रघुवर विमल यशु जो दायकु फलचारी।। अर्थात मैं श्री गुरु महाराज के चरण कमलों की धूलि से अपने मन रूपी दर्पनको पवित्र करके श्री रघुवीर के निर्मल यश का वर्णन करता हूँ।

अर्थ: अपने गुरुओं का आदर करें।

 

आपका गुरु आपके माता पिता,आपके भाई बहन एवम आपके शिक्षक भी हो सकते हैं।उनसे सच्चे मन से लिया ज्ञान जीवन में कभी व्यर्थ नहीं जाता।

2.महावीर विक्रम बजरंगी कुमति निवार सुमति के संगी।। अर्थात हे महावीर आप खराब बुद्धि को दूर करते हैं एवम अच्छी बुद्धि के सहायक हैं।

 

अर्थ: अपनी सोच अच्छी एवम सकारात्मक रखें

आप तभी आगे बढ़ सकते हैं जब आप अपनी सोच अच्छी रखेंगें।

 

3.विद्यावान गुणी अति चातुर राम काज करिबे को आतुर।। अर्थात आप विद्यावान, गुणी,कार्य कुशल हैं एवम भगवान राम की सेवा को आतुर रहते हैं।

अर्थ: आलस छोड़ें,हर कार्य को तनमयता से करें।

 

सफल होना है तो आलस छोड़कर पूरे मन से अपने लक्ष्य को हासिल करने मे लग जाईये।सफलता निश्चित है।

 

4.सूक्ष्म रूप धरि सियहिं दिखावा विकट रूप धरि लंक जरावा।भीम रूप धरि असुर संहारे राम चन्द्र के काज सँवारे।।अर्थात आपने अपना सूक्ष्म रूप सीता जी को दिखाया एवम वीभत्स रूप लेकर पूरी लंका जला दी।भीष्म रूप लेकर असुरों का संहार किया एवम राम चंद्र जी के कार्य को आसान कर दिया।

अर्थ: परिस्थितियों के अनुसार सही निर्णय लें।

शांतिपूर्ण तरीके से कई समस्याओं का समाधान निकल सकता है परंतु कठिन परिस्थितियों में कभी कभी साम दाम दंड भेद का इस्तेमाल कर सकते हैं।

 

5.लाए संजीवन लखनजियाये।श्री रघुवीर हरषि उर लाये।।अर्थात आप लक्ष्मण के लिए दुर्लभ संजीवनी बूटी लेकर आये एवम श्री राम को प्रसन्न कर दिया।

अर्थ: दूसरों की मदद करना सीखें।

 

किसी के मुश्किल वक़्त में आप उसकी मदद करके दुआ तो पाएंगे ही साथ ही खुद के जीवन के उद्देश्य को भी सफल करेंगे। क्या पता जीवन के किसी मोड़ पर वही व्यक्ति आपकी भी मदद कर दे।

 

6.तुम्हरो मंत्र विभीषण माना।लंकेश्वर भय सब जग जाना।। अर्थात तुम्हारी बातें विभीषण ने मानी।अंत में वह लंका का राजा बना।

अर्थ: अपनी बात सबके सामने रखना सीखें।

 

अपनी बात रखना सीखें।यह आपके आत्मविश्वास को दिखाती है। एक आत्मविश्वास से भरे व्यक्ति की ही बात हर कोई सुनता है।

 

7.जुग सहस्त्र जोजन पर भानु। लील्यो ताहि मधुर फल जानु।।अर्थात तुमने 2000 योजन दूर सूर्य को भी फल समझ कर खा लिया था।

अर्थ:अपना लक्ष्य बड़ा रखें।

 

अपना लक्ष्य बड़ा रखें।कोई भी काम असंभव नहीं है।बस सही प्लानिंग के साथ उस लक्ष्य को पाने में जुट जाएं।आपका जीतना तय है।

इस तरह आप हनुमान चालीसा की पंक्तियों के अर्थों को समझ कर अपने जीवन को सही दिशा दे सकते हैं।

 

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