देवभूमि यानी कि देवताओं की भूमि। उत्तराखंड एक खूबसूरत राज्य है जो कि कई प्राचीन परम्पराओं,

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एवम धार्मिक स्थलों एवम उनकी मान्यताओं का प्राचीन समय से साक्षी रहा है।इसके उत्तरपूर्व मे हिमालय श्रृंखला है जो कि देवताओं का स्थल माना गया है । साथ ही इस राज्य के हिमनद(ग्लेशियर) पूरे भारत वर्ष को जीवनदायिनी स्त्रोतों से तर्पित करते हैं। हमारी प्रकृति हमेशा हमारे प्रति समर्पित रही, परन्तु समय के साथ साथ हम प्रकृति के प्रति विमुख होते चले गए। इसे हमारी मूर्खता कहें परन्तु मानवीय हस्तक्षेप के कारण प्रकृति का भयावह रूप हमें ही भुगतना पड़ता है।चाहे वो भूस्खलन के रूप में हो या फिर केदारनाथ में आई दैवीय आपदा के रुप में। आईये आज हम आपको मानवीय हस्तक्षेप की वह तस्वीरें दिखाते हैं जिन्हें देखकर मानवता शर्मसार हो जाएगी।

यह तस्वीर गौमुख ग्लेशियर की है जिसे गंगा का उद्गम माना गया है। यह तसवीर ली है आई आई टी रुड़की के छात्रदल ने जो स्वच्छता अभियान के तहत 18 सिंतबर को गंगोत्री धाम के लिए रवाना हुए थे।

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20 सिंतबर की सुबह इस दल ने भोजवासा कैम्प से गौमुख यात्रा शुरू की। जब गौमुख पहुंचे तो वहां की गंदगी देख कर सब हैरान हो गए। वहां जगह जगह बिसकिट्स के रेपर, प्लास्टिक के थैले, प्लास्टिक की बोतलें बिखरी हुई थी। हैरानी की बात यह है कि वह कचरा 10 सालों से वहां पड़ा है।यह एक बिस्कुट के रेपर पर लिखी तारीख से पता चला है।

यही नही जिन्होंने यहां कूड़ा एकत्र किया उन्होंने या तो यहीं उस कूड़े को जला दिया या फिर यहीं एक जगह एक कूड़ेदान मे फेंक दिया।उन्होंने इस कचरे को अपने साथ ले जाने की जहमत भी नही उठाई।

एक कूडेदान में तो आधा जला हुआ कचरा नए कचरे के साथ मिला हुआ था। इन कारणों से वो कचरा कई वर्षों से वहाँ सड़ रहा था।

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