भारत के ऐसे 11 राज्य जहां लागू हैं विशेष कानून, आप भी जानें

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जम्मू कश्मीर से धारा 370 को हटाने की बात से सभी चकित रह गए हैं। जम्मू कश्मीर से लद्दाख को अब अलग कर दिया गया है और दोनों को केंद्रशासित प्रदेश का दर्जा मिल गया है। मगर जम्मू कश्मीर के अलावा भी भारत में ऐसे राज्य हैं जहां लागू है विशेष कानून।

सिक्किम- 371एफ- 36वां संसोधन एक्ट 1975

इसमें राज्यपाल के पास विशेष अधिकार होते हैं। इसमें राज्यपाल के फैसले पर कोर्ट में विशेष अपील नही की जा सकती है। राज्य के विधानसभा के प्रतिनिधि मिलकर किसी ऐसे को प्रतिनिधि चुनेंगे जो राज्य के विभिन्न वर्गों के लोगों के अधिकारों का ख्याल रखें।

असम-371बी – 22वां संसोधन एक्ट 1969

इसमें राज्य के आदिवासी इलाकों से चुनकर आए विधानसभा के प्रतिनिधियों की राष्ट्रपति एक कमेटी बना सकते हैं।

अरुणाचल प्रदेश- 371एच- 55वां संसोधन 1986

राज्यपाल को राज्य के कानून और सुरक्षा को लेकर विशेष अधिकार मिलते हैं। वह मंत्रियों के परिषद से चर्चा करके अपने फैसले को लागू करा सकते हैं। लेकिन इस चर्चा के दौरान मंत्रियों का परिषद राज्यपाल के फैसले पर कोई सवाल नहीं उठा सकता। राज्यपाल का फैसला ही अंतिम फैसला होगा।

नागालैंड- 371ए – 13वां संसोधन एक्ट 1962

ये कानून तब बनाया गया था जब नागा लोगों और भारत सरकार के बीच 16 बिंदुओ पर समझौता हुआ था। इसमें नागा लोगों के जमीन के हक को लेकर संसद न्याय सम्बन्धी नियमों को बदल नही सकता है।

मिजोरम – 371जी – 53वांवां संसोधन एक्ट 1986

इसमें मिजो लोगों के जमीन के हक को लेकर संसद न्याय सम्बन्धी नियमों को बदल नही सकता है। केंद्र सरकार तभी फैसला लेगी जब राज्य की विधानसभा कोई संकल्प लेकर न आ पाए।

मणिपुर- 371 सी- 27वां संसोधन एक्ट 1971

इसमें राष्ट्रीय राज्य के राज्यपाल को विशेष ज़िम्मेदारी देकर चुने गए प्रतिनिधियों की एक कमेटी बना सकते हैं। ये कमेटी राज्य के विकास सम्बन्धी कार्यों की देखरेख करती है जिसकी जानकारी राज्यपाल राष्ट्रपति को सालाना देंगे।

आंध्र प्रदेश और तेलंगाना- 371डी- 32वां संसोधन एक्ट 1973

इन राज्यों के लिए राष्ट्रपति के पास यह अधिकार होता है कि वह राज्य सरकार को आदेश दे कि किस जॉब में किस वर्ग के लोगों को नौकरी दी जा सकती है। इसी तरह शिक्षण संस्थानों में भी राज्य के लोगों को बराबर हिस्सेदारी या आरक्षण मिलता है। राष्ट्रपति नागरिक सेवाओं से जुड़े पदों पर नियुक्ति से संबंधित मामलों को निपटाने के लिए हाईकोर्ट से अलग ट्रिब्यूनल बना सकते हैं।

कर्नाटक- 371जे – 98वां संसोधन एक्ट 2012

इसके तहत अलग से विकास बोर्ड बनाया जाता है और सालाना इसकी रिपोर्ट विधानसभा में पेश की जाती है। बताए गए क्षेत्रों के विकास के लिए अलग से फंड मिलता है।

महाराष्ट्र और गुजरात- आर्टिकल 371

महाराष्ट्र और गुजरात, दोनों राज्यों के राज्यपाल को आर्टिकल 371 के तहत ये विशेष जिम्मेदारी है कि वे महाराष्ट्र के विदर्भ, मराठवाड़ा और गुजरात के सौराष्ट्र और कच्छ के अलग विकास बोर्ड बना सकते हैं। इन इलाकों में विकास कार्य के लिए बराबर फंड दिया जाएगा। टेक्निकल एजुकेशन, वोकेशनल ट्रेनिंग और रोजगार के लिए उपयुक्त कार्यक्रमों के लिए भी राज्यपाल विशेष व्यवस्था कर सकते हैं।

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