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छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले से सामने आई ये खबर इंसानियत के मतलब को बड़े अच्छे ढंग से परिभाषित करती है। दरअसल, राजपुर विकासखंड से जुड़ी यह खबर एक ऐसी महिला स्वास्थ्य कार्यकर्ता की कहानी है, जिसे जान हर कोई उनपर गर्व करेगा। हम सभी Doctors को भगवान के स्तर पर देखते है। जिनके ऊपर मौत से जूझ रहें व्यक्ति को बचाने की बड़ी ज़िम्मेदारी होती है। लेकिन वहीं दूसरी तरफ कई बार हॉस्पिटल और डॉक्टरों के उम्मीदों पर खरा न उतरने के कारण व्यक्ति उनपर आरोप भी लगा देता है। व्यक्ति डॉक्टर के काम को बिज़नस बोल देता है। पर हर इंसान ऐसा नहीं होता, जिसे समझने की ज़रूरत होती है।

इसी की एक बड़ी मिसाल पेश की है इस महिला स्वास्थ्य कार्यकर्ता ने, जिनका नाम है पुष्पलता। जोकि जिले के राजपुर विकासखंड के अलखडीहा उपस्वास्थ्य केंद्र में काम करती है। पुष्पलता जोकि अपनी जान जोखिम में डालकर, बहती नदी पार करके ग्राम क्षेत्रों में रहने वाले ग्रामीणों को स्वास्थय सेवा देने गई।

बता दें कि राजपुर के तीन ऐसे गांव जो कि नदियों से घिरे हुए है और इन नदीयों पर पुल तक नही है। जिस कारण वहाँ तक एम्बुलेंस भी नहीं पहुँच पाती है। ऐसे में इस महिला ने हिम्मत दिखाई और अपने काम को किसी भी हाल में रोका नहीं। पूरी घटना पर खुद पुष्पलता ने कहा कि ‘बरसात के दिनों में नदी में पानी का बहाव तेज रहता है। जिससे डर भी लगता है, लेकिन ग्रामीणों को स्वास्थ्य सेवाएं देने के लिए और अपनी ड्यूटी पूरी करने के लिए पहुँच विहीन ग्रामों में अपनी जान जोखिम में डालकर स्वास्थ्य सेवाएं दे रहे हूँ’।

होसले और हिम्मत की ऐसी कहानियां बेहद कम ही देखने और सुनने को मिलती है। अपनी ड्यूटि को लेकर इतनी वफादारी अपने आप में एक सराहनीय काम है। पुष्पलता के हिम्मत को देख खुद वहाँ के सभी ग्रामीण बेहद खुश है और ऐसे हौसले को सलाम करते है।

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