क्या आप जानते हैं भारत की 7 सबसे ऊंची मूर्तियों के बारे में अगर नहीं तो जान लीजिए

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भारत के ऐसा देश है जहां संस्कृति और धर्म को सबसे आगे रखा जाता है। भारत में सबसे ज्यादा लोग हिन्दू जाति के हैं और आप सभी जानते हैं कि हिन्दू धर्म में मंदिरों और भगवानों का कितना अधिक महत्त्व है। भारतीयों के जीवन में मूर्तियों का बहुत ऊंचा स्थान है। पत्थर की मूर्ति में यहां सबको भगवान नज़र आते हैं। यहां के लोगों की आस्था का प्रतीक है ये मूर्तियां। यहां आपको हर तरह की मूर्तियां देखने को मिल जाएगी और इतना ही नहीं यहां की कुछ मूर्तियां इतनी लंबी और बड़ी हैं कि कोसों दूर से वो दिखाई पड़ती हैं।
दोस्तों आज हम आपको भारत की सबसे ऊंची मूर्तियों के बारे में बताने जा रहे हैं। जिन्हें ऊंचाई के लिए विदेशों में भी जाना जाता है।

● स्टेचू ऑफ यूनिटी


इसका निर्माण 2018 में पूरा हुआ है और ये सरदार पटेल की याद में बनाई गई है। ये मूर्ति नर्मदा नदी के पास बनाई गई है। इस मूर्ति की कुल ऊंचाई है 182 मीटर। ये बहुत ही सुंदर मूर्ति है।

● वीरा अभय अंजनेय हनुमान स्वामी


ये मूर्ति भगवान राम के सबसे बड़े भक्त हनुमान जी की है। ये मूर्ति आंध्र प्रदेश के विजयवाड़ा के पास परिताला में स्थित है। इस मूर्ति की जो स्थापना हुई थी वो 2003 में 22 जून को हुई थी।

● तिरुवल्लुवर मूर्ति


तिरुवल्लुवार लंबी मूर्ति बंगाल की खाड़ी, अरब सागर और हिंद महासागर के संगम पर कन्याकुमारी शहर के एक छोटे से द्वीप पर स्थित है। यह 95 फीट लंबी मूर्ति है।

● तथगाता तल


ये भगवान बुद्ध की मूर्ति है। ये उनकी सबसे ऊंची मूर्ति है। ये मूर्ति दक्षिण सिक्किम में रावणला के बुद्ध पार्क में स्थित है। इस मूर्ति की ऊंचाई 39 मीटर है और इसका निर्माण 2006 से 2013 के बीच हुआ था।

● ध्यान बुद्ध प्रतिमा


ये भी भगवान बुद्ध की ही मूर्ति है और ये आंध्र प्रदेश के कृष्णा नदी के तट पर स्थित है।

● पद्मसम्भव की प्रतिमा


पद्मसंभव बौद्ध धर्म का ऋषि गुरु था। पद्मसंभव का शाब्दिक अर्थ होता है कमल से पैदा हुआ। पद्मसंभव की प्रतिमा हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले में मशहूर रेवालसर झील के पास मौजूद एक विशाल मूर्तियों में से एक है। इस मूर्ति की ऊंचाई 123 फीट है।

● मुरुदेश्वर के भगवान शिव की मूर्ति


भगवान शिव की इस मूर्ति की ऊंचाई 122 फुट है। ये कर्नाटक राज्य के उत्तरा कन्नड़ जिले के मुरुदेश्वर शहर में स्थित है। मुरुदेश्वर शहर का नाम भगवान शिव के नाम पर ही पड़ा है। ये भारत के प्रसिद्ध मन्दिरों में से एक है।

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