भाद्रपद महीने की शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि को अनंत चतुर्दशी का पर्व माना जाता है। अनंत चतुर्दशी के दिन भगवान श्री विष्णु की विशेष पूजा का महत्त्व होता है। अनन्त चतुर्दशी के दिन व्रत रखकर विष्णु जी की पूजा करने का खास महत्व होता है।

इस वर्ष अनंत चतुर्दशी का पर्व 12 सितंबर को पड़ रहा है। इस पोस्ट में हम आपके लिए अनंत चतुर्दशी के व्रत तथा पूजा की विधि लेकर आये हैं। आइए जानते हैं क्या है अनंत चतुर्दशी के व्रत एवं पूजा की विधि-

अनंत चतुर्दशी के व्रत एवं पूजा की विधि-

शास्त्रों के अनुसार अनंत चतुर्दशी के पर्व पर किसी नदी अथवा तालाब के किनारे पूजा करने से इस से विशेष लाभ की प्राप्ति होती है। अनंत चतुर्दशी के दिन महिला तथा पुरुष को व्रत धारण करना चाहिए। इसके बाद किसी नदी अथवा तालाब के किनारे जाकर वहां पर भगवान श्री हरि पूजन इत्यादि करने के बाद उनके कथा का पाठ एवं श्रवण करना चाहिए।

अनंत चतुर्दशी के दिन श्री सत्यनारायण की कथा सुनने से विशेष लाभ मिलता है। जिस भी मनोकामना को मन में रखकर आप अनंत चतुर्दशी के दिन श्री सत्यनारायण कथा का श्रवण करते हैं वह सारी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।

अनंत चतुर्दशी के दिन पुरुषों को दाहिने हाथ में तथा महिलाओं को बाएं हाथ में कपास्या रेशम के धागे को धारण करना चाहिए। जो लोग अनंत चतुर्दशी का व्रत रखते हैं उन्हें चाहिए कि वह आटे की रोटियां बना कर पूजा के पश्चात आधी रोटी ओ को ब्राह्मण को दान दे तथा आधे भाग को स्वयं ग्रहण करे। ऐसा करने से श्री हरि प्रसन्न होते हैं और मन की सभी मनोकामना को पूर्ण करते हैं।

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पूजन सामग्री-

अनंत चतुर्दशी के दिन श्रीहरि के पूजन के लिए हल्दी कुमकुम अक्षत पुष्प धूप दीप नैवेद्य आदि पूजन सामग्री का इस्तेमाल करना चाहिए। अनंत चतुर्दशी के दिन व्रत रखकर सच्चे मन से भगवान श्री विष्णु की पूजा करने से मन की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती है।

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