पिता को सम्मान दिलाने के लिए बेटी ने उठाया ये कदम

भारत चाहे जितना भी आगे बढ़ गया हो मगर यहां रह रहे आम आदमी को अपना काम करवाने के लिए दफ्तरों में ठोकरें खानी पड़ ही जाती हैं। ऐसा नहीं है कि जो बड़ी बड़ी पोस्ट पर पहुंच जाता है उनका रवैया ही ऐसा हो जाता है कि वो लोगों को धक्के खिलवाए बल्कि उन तक पहुंचने की जो सीढ़ी होती है न वो ही बहुत लंबी और कठिन होती है। एक ऐसी ही घटना घटी एक आम आदमी के साथ और जब उसकी बेटी ने अपने लाचार पिता को देखा तो उसने कर दिखाया कुछ ऐसा।

पिता को कलेक्टर ऑफिस के ठो क रें खाते देख, बेटी ने किया कुछ ऐसा कि दुनिया कर रही है सलाम

बेटी के पिता बहुत दिनों तक महज़ एक दस्तखत के लिए कलेक्टर के दफ्तर के रोज चक्कर लगाया करते थे। तभी से उस बेटी ने ठान लिया कि जो उसके पिता ने सहा है वो किसी और के पिता को न सहना पड़े इसीलिए वो खुद एक कलेक्टर बनेगी।

आखिरकार बेटी ने इस सपने को सच कर दिखाया और एक आईएएस अधिकारी बन ही गईं। जिस बेटी की हम बात कर रहे हैं वो हैं आईएएस अधिकारी रोहिणी भाजीभकरे। दरअसल बहुत सालों पहले एक किसान महाराष्ट्र का एक दस्तखत के लिए सरकारी दफ्तर के चक्कर काटते नहीं थक रहा था तो उसकी बेटी ने उससे पूछ लिया कि, “पिताजी आप क्या कर रहे हैं? आपको क्यूँ इतना परेशान होना पड़ रहा है? आम जन की परेशानी खत्म हो ये सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी किसकी है?”

तब उसके पिता ने जवाब दिया जिला कलेक्टर। ये जवाब सुनकर ही बच्ची ने ठान लिया था कि उसे कलेक्टर ही बनना है। उस वक़्त रोहिणी की उम्र महज़ 9 साल थी और फिर 23 साल बाद रोहिणी ने अपने उस बचपन के सपने को साकार कर दिखाया। वो तमिलनाडु के सेलम जिले की 170 पुरुषों के बाद पहली महिला आईएएस अफसर बनी। रोहिणी किसी भी कार्य को करने से पूर्व उस पर विचार करती हैं और बहुत ही सूझबूझ से किसी भी कार्य को करती हैं।

ऐसे हुई रोहिणी की शिक्षा

रोहिणी से बातचीत करने पर वो बताती हैं कि, “मैंने सरकारी स्कूल में अध्ययन किया है और मेरी इंजीनियरिंग की पढ़ाई एक सरकारी कॉलेज से हुई, साथ ही मैंने सिविल सेवा परीक्षा में कोई निजी कोचिंग की सहायता भी नहीं ली। मेरे अनुभव ने मुझे यह यकीन दिलाया है कि हमारे सरकारी स्कूलों में भी बहुत अच्छे शिक्षक हैं और यदि कोई कमी है तो केवल बुनियादी सुविधाओं की।” फिर जिम्मेदारियों की बात करते हुए रोहिणी कहती हैं कि , “जिले की पहली महिला कलेक्टर होने के साथ-साथ कई सारी जिम्मेदारियां अपने आप ही आ जाती है। मैं अपनी जिम्मेदरियों को महिला सशक्तिकरण के संकेत के रूप में देखती हूँ।”

रोहिणी अब एक अच्छी आईएएस अफसर के रूप में निखर कर सामने आ रही हैं। वो सभी की बातें सुनती हैं और सबकी सहायता के लिए हमेशा आगे रहती हैं।

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