मां बाप अपने बच्चों की खुशी के लिए क्या कुछ नहीं करते। बच्चे अपने मां बाप को जिंदगी भर का गम देने से पहले एक बार सोचते तक नहीं। बच्चों की खुशियों के लिए मां-बाप अपनी जिंदगी तक कुर्बान कर देते हैं। लेकिन बहुत से बच्चे ऐसे होते हैं जो मां-बाप की इस कुर्बानी को समझ ही नहीं पाते। हम ऐसा नहीं कह रहे हैं कि दुनिया के सभी बच्चे हैं, परंतु कुछ बच्चे ऐसे होते हैं जो मां-बाप की कठिन तपस्या को समझ नहीं पाते हैं और ऐसा कदम उठा लेते हैं जो उनके मां-बाप के लिए नासूर बन जाता है।

ऐसा ही एक मामला सामने आया है, राजस्थान राज्य के जयपुर जिले की कोटपूतली तहसील से। यहां के निवासी भीखाराम की शादी के 12 साल बाद ही, उनकी पत्नी का निधन हो गया। इनके दो बच्चे थे एक बेटा और एक बेटी। पत्नी के निधन के बाद दुखी मन से भीकाराम स्वयं ही अपने बच्चों का पालन-पोषण करने लगे। परंतु शायद किस्मत को कुछ और ही मंजूर था और कुछ समय बाद ही एक दुर्घटना में उनके बेटे की भी मृ त्यु हो गयी। अब भीकाराम के पास उनका एकमात्र सहारा थी उनकी बेटी, जिसको देखकर वह जीते थे।

बेटी की पढ़ाई के लिए पिता ने बेच दी अपनी किडनी-

भीखाराम का सपना था कि वह अपनी बेटी को पढ़ा लिखा कर एक बड़ा आदमी बनाये। और इसी सपने को पूरा करने में उन्होंने अपनी जिंदगी लगा दी। उन्होंने अपनी बेटी का एडमिशन बीकानेर के एक मेडिकल कॉलेज में कराया। उनके पास अधिक पैसे नहीं थे, यही वजह थी कि जब तीसरे साल की फीस भरने की बारी आई तो फीस भरने के लिए भीखाराम ने अपनी किडनी बेच दी। परंतु भीखाराम कि इस तपस्या का जो फल उनकी बेटी ने दिया, उसके बाद भीखाराम की जिंदगी थम सी गयी।

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दरअसल उनकी बेटी को, मेडिकल कॉलेज में ही एक स्टूडेंट से प्यार हो गया। कुछ समय बाद उस लड़के ने, धोखा दे दिया। इस घटना के बाद से ही इनकी बेटी डिप्रेशन में चली गई और उसने सुसाइड कर लिया। उसने एक बार भी अपने पिता के बारे में नहीं सोचा। बेटी द्वारा उठाए गए इस कदम ने भीकाराम को पूरी तरह से तोड़ दिया। वह बिल्कुल अकेले हो गए।

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