प्यार दुनिया का सबसे खूबसूरत अहसास होता है यह हम सब जानते हैं। प्यार के रिश्ते में वह ताकत होती है जो दुनिया के और किसी रिश्ते में नहीं होती है। दुनिया में सच्चे प्यार के कई उदाहरण मौजूद हैं, जो प्यार की ताकत को बयां करने के लिए काफी हैं। सच्चे प्यार में इतनी ताकत होती है कि वह दुनिया की हर मुसीबत का डटकर मुकाबला कर सकते हैं। यूं तो आपने सच्चे प्यार की कई कहानियां सुनी होंगी। परंतु आज के इस पोस्ट पर हम एक ऐसे बुजुर्ग की कहानी लेकर आए हैं जिसको पढ़ने के बाद आपकी आंखों में भी आंसू आ जाएंगे। 87 वर्षीय इस बुजुर्ग ने अपने प्यार के लिए जो किया वह बेहद हैरान करने वाला है।

जानिए 87 वर्षीय बुजुर्ग की प्रेम कहानी-

दोस्तो हम जिस बुजुर्गों की बात कर रहे हैं वह बिहार राज्य के रहने वाले हैं। बिहार राज्य के पूर्णिया के रुपौली के रहने वाले इस नाम है भोलानाथ आलोक। भोलानाथ की पत्नी गुजर चुकी हैं। इनकी पत्नी को गुजरे 27 साल हो गए। आपको जानकर हैरानी होगी कि भोलानाथ ने अपनी पत्नी की अस्थियों को 27 साल से संजोकर रखा हुआ है। उनकी यह इच्छा है कि जब उनका निधन हो तो उनकी अस्थियों को उनकी पत्नी की अस्थियों के साथ प्रवाहित किया जाए। भोलेनाथ का यह अनूठा प्रेम देखकर हर कोई हैरान है। वह पिछले 27 सालों से अपनी मौत का इंतजार कर रहे हैं।

भोलानाथ ने अपनी पत्नी की अस्थियों को एक पोटली में बांधकर घर के बगीचे में लगे एक पेड़ पर लटकाया हुआ है। भोलानाथ का कहना है कि जब उनकी शादी हुई थी तब उनकी और उनकी पत्नी की उम्र बहुत कम थी। उसी समय उन दोनों ने साथ जीने मरने की कसमें खाई थी। उनकी पत्नी का तो देहांत हो गया, परंतु वह जिंदा हैं, और पल पल दुनिया को अलविदा कहने का इंतजार कर रहे हैं।

भोलानाथ का कहना है कि-

‘मेरी पद्मा (पत्नी का नाम) भले ही नहीं हैं, लेकिन ये अस्थियां उनकी यादें मिटने नहीं देतीं। जब भी किसी परेशानी में होता हूं, तो लगता है वह यहीं हैं। बच्चों को भी कह रखा है कि मेरी अंतिम यात्रा में पत्नी की अस्थियों की पोटली साथ ले जाना और चिता पर मेरी छाती से लगाकर ही अंतिम संस्कार करना।’

आगे बताते हुए भोलानाथ जी कहते हैं कि-

‘पद्मा का भगवान पर बड़ा विश्वास था. हम दोनों की जिंदगी बढ़िया से कट रह थी परंतु करीब 27 साल पहले पत्नी बीमार हुईं। इलाज और दवा में कोई कमी नहीं हुई पर कहते हैं न कि अच्छे व्यक्ति को भगवान जल्दी अपने पास बुला लेते हैं। भगवान ने पद्मा को भी बुला लिया और पद्मा अपना वादा तोड़कर चली गई। इसके बाद हमने बच्चों की परवरिश की और अब वे बड़े हो गए। इस सामाजिक जीवन के उधेड़बुन में भी मैं पद्मा को नहीं भूला। पत्नी के साथ मर तो नहीं सकता था। परंतु उनके छोड़ जाने का गम मैं अब तक नहीं भूल पाया। बगीचे के एक आम के पेड़ में उनकी अस्थियां एक कलश में समेट कर रखा हूं। वहीं नीचे तुलसी का पौधा लगा हुआ है।’

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आगे उन्होंने कहा कि- ‘यहां ना सही परंतु ऊपर जब पद्मा से मिलूंगा, तब यह तो बता सकूंगा कि मैंने अपना वादा निभाया’। भोलानाथ के दामाद का कहना है कि-‘यह प्रेम का अनूठा उदाहरण है। उनकी अंतिम इच्छा हमलोग जरूर पूरी करेंगे।’

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