गैसलाइटिंग एक मानसिक बीमारी का जरिया, कैसे करें इसकी पहचान और इससे बचाव

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गैसलाइटिंग एक ऐसा दुर्व्य वहार है जिसने इस तरह ब्रेनवाशिंग की जाती है कि व्यक्ति को अपनी काबिलियत और फैसलों पर शक होने लगता है। यहां तक कि गलती ना होने पर भी व्यक्ति खुद को कसूरवार ठहराने लगता है। मनोवैज्ञानिक के मुताबिक गैस लाइट सम्मोहन की पहली स्टेज होती है। इसके प्रभाव में वह लोग जल्दी आते हैं जो अप्रूवल नेचर यानी बात-बात में यह मालूम करने वाले की क्या मैं सही हूं जैसी प्रकृति के होते हैं। और जिनका आत्मविश्वास कम होता है। गैसलाइटिंग का अलग अलग व्यक्ति पर अलग-अलग प्रभाव होता है यह इस बात पर निर्भर करता है। कि किस व्यक्ति के साथ कैसा व्यवहार किया जा रहा है।

साल 1944 में हॉलीवुड में गैसलाइटिंग से संबंधित एक फिल्म भी आ चुकी है जिसका नाम है ‘गैसलाइट’। गैसलाइटिंग का शिकार हुए व्यक्ति का आत्मविश्वास पूरी तरह से डगमगा जाता है और वह सही फैसला ले पाने में सक्षम नहीं होता है। किसी भी व्यक्ति के जीवन में गैस लाइटर कोई भी हो सकता है कोई मित्र सहकर्मी जीवन साथी भाई बहन अथवा माता-पिता भी।

कैसे करें समस्या की पहचान
यदि आपके और साथ ही रिश्तेदार या सहकर्मी के बीच अगर कोई चीज आपको भ्रमित कर रही है तो आप गैसलाइट हो रहे हो। यदि आपको ऐसा प्रतीत हो रहा है कि कोई करीबी व्यक्ति आपको गैसलाइटिंग का शिकार बना रहा है तो खुद को मजबूत बनाते हुए ऐसे व्यक्ति से दूरी बना ले।


कैसे करें बचाव-
यदि आपको किसी रिश्ते में ऐसा महसूस हो रहा है कि आप वहां पर भ्रमित हो रहे हैं तो उस शख्स से दूरी बना ले। आपको अपनी जिंदगी अपने हिसाब से जीनी है इसलिए दूसरों के विचारों को अपने ऊपर हावी ना होने। अपनी भावनाओं को दबाने के बजाय उन्हें खुलकर जाहिर करे। यदि कोई व्यक्ति आपकी सही बात को गलत कहता है तो उस वक्त कमजोर बनने के बजाय अपने पक्ष को मजबूती से रखे। दूसरों के विचारों को अपने विचारों पर हावी ना होने दें।

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